श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  13.64.37 
कृत्यानामधिशस्तानामरिष्टशमनं महत्।
प्रायश्चित्तं महीं दत्त्वा पुनात्युभयतो दश॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
अत्यंत शक्तिशाली कृत्या (संहारक शक्ति) के प्रयोग से उत्पन्न भय को शांत करने का सबसे बड़ा साधन भूमिदान है। भूमिदान रूपी तप से मनुष्य अपनी तथा परलोक की दस पीढ़ियों को पवित्र कर लेता है। 37.
 
The greatest means of calming the fear that is generated by the use of extremely powerful Kritya (killing power) is the donation of land. By doing penance in the form of land donation, a man purifies his next and next ten generations. 37.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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