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श्लोक 13.64.26  |
यथा जनित्री स्वं पुत्रं क्षीरेण भरते सदा।
अनुगृह्णाति दातारं तथा सर्वरसैर्मही॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| जैसे माता अपने बच्चे को दूध पिलाकर उसका पालन-पोषण करती है, वैसे ही पृथ्वी भी सब प्रकार के रस प्रदान करके भूमिदाता को धन्य करती है ॥26॥ |
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| Just as a mother nourishes her child by feeding it milk, similarly the Earth blesses the giver of the land by providing all kinds of juices. ॥26॥ |
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