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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद
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श्लोक 26
श्लोक
13.64.26
यथा जनित्री स्वं पुत्रं क्षीरेण भरते सदा।
अनुगृह्णाति दातारं तथा सर्वरसैर्मही॥ २६॥
अनुवाद
जैसे माता अपने बच्चे को दूध पिलाकर उसका पालन-पोषण करती है, वैसे ही पृथ्वी भी सब प्रकार के रस प्रदान करके भूमिदाता को धन्य करती है ॥26॥
Just as a mother nourishes her child by feeding it milk, similarly the Earth blesses the giver of the land by providing all kinds of juices. ॥26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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