श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.64.2 
भीष्म उवाच
अतिदानानि सर्वाणि पृथिवीदानमुच्यते।
अचला ह्यक्षया भूमिर्दोग्ध्री कामानिहोत्तमान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी ने कहा- बेटा! पृथ्वी का दान सभी दानों में श्रेष्ठ कहा गया है। पृथ्वी अचल और अविनाशी है। यह इस लोक में सभी उत्तम सुखों को प्रदान करती है।
 
Bhishmaji said-Son! The donation of the earth is said to be the best of all donations. The earth is immovable and indestructible. It gives all the best pleasures in this world.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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