श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.64.19 
यत् किंचित् पुरुष: पापं कुरुते वृत्तिकर्शित:।
अपि गोचर्ममात्रेण भूमिदानेन पूयते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जीविका के अभाव से उत्पन्न क्लेश के कारण मनुष्य जो-जो पाप करता है, वे सब पाप गौ की खाल के बराबर भूमि दान करने से धुल जाते हैं ॥19॥
 
Whatever sins a man commits due to the distress caused by lack of livelihood, all those sins are washed away by donating land equal to the skin of a cow.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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