श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.64.17 
भूमिं दत्त्वा तु साधुभ्यो विन्दते भूमिमुत्तमाम्।
प्रेत्य चेह च धर्मात्मा सम्प्राप्नोति महद् यश:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महापुरुषों को भूमि दान करने से दानकर्ता को उत्तम भूमि प्राप्त होती है और वह पुण्यात्मा इस लोक और परलोक में भी महान यश प्राप्त करता है ॥17॥
 
By donating land to great men, the donor gets a good land and that pious person gets great fame in this world and the next world too. 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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