श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.64.12 
नामास्या: प्रियदत्तेति गुह्यं देव्या: सनातनम्।
दानं वाप्यथवाऽऽदानं नामास्या: प्रथमं प्रियम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वीदेवी का सनातन गुप्त नाम 'प्रियदत्ता' है। इनका दान और ग्रहण, देने वाले और लेने वाले दोनों को प्रिय है; इसीलिए यह प्रथम नाम सबको प्रिय है॥12॥
 
The eternal secret name of this Earth Goddess is 'Priyadatta'. Her donation and acceptance are both dear to the giver and the receiver; that is why this first name is dear to everyone.॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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