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mahabharat 13.63.4: भीष्म बोले, "बेटा! क्षत्रिय को सदैव कठिन कर्म करने पड़ते हैं। अतः यहाँ यज्ञ और दान ही उसे शुद्ध करने वाले कर्म हैं।"   |   mahabharat अध्याय 13.63: राजाके लिये यज्ञ, दान और ब्राह्मण आदि प्रजाकी रक्षाका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 63: राजाके लिये यज्ञ, दान और ब्राह्मण आदि प्रजाकी रक्षाका उपदेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.63.4 
भीष्म उवाच
रौद्रं कर्म क्षत्रियस्य सततं तात वर्तते।
तस्य वैतानिकं कर्म दानं चैवेह पावनम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "बेटा! क्षत्रिय को सदैव कठिन कर्म करने पड़ते हैं। अतः यहाँ यज्ञ और दान ही उसे शुद्ध करने वाले कर्म हैं।"
 
Bhishma said, "Son! A Kshatriya always has to perform hard deeds. Hence, here, only sacrifices and donations are the deeds that purify him."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)