श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 63: राजाके लिये यज्ञ, दान और ब्राह्मण आदि प्रजाकी रक्षाका उपदेश  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  13.63.34 
पापं कुर्वन्ति यत् किंचित् प्रजा राज्ञा ह्यरक्षिता:।
चतुर्थं तस्य पापस्य राजा विन्दति भारत॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! राजा की रक्षा के बिना प्रजा जो पाप करती है, उसका एक चौथाई भाग राजा को भी मिलता है ॥ 34॥
 
O son of Bharat! Whatever sins the subjects commit without being protected by the king, a fourth part of those sins also accrue to the king. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)