| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 63: राजाके लिये यज्ञ, दान और ब्राह्मण आदि प्रजाकी रक्षाका उपदेश » श्लोक 31 |
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| | | | श्लोक 13.63.31  | क्रोशन्त्यो यस्य वै राष्ट्राद् हृयन्ते तरसा स्त्रिय:।
क्रोशतां पतिपुत्राणां मृतोऽसौ न च जीवति॥ ३१॥ | | | | | | अनुवाद | | जिसके राज्य से रोती-बिलखती स्त्रियों को बलपूर्वक हरण कर लिया जाता है और उनके पतियों तथा पुत्रों को रोते-बिलखते छोड़ दिया जाता है, वह राजा नहीं, बल्कि मरा हुआ मनुष्य है। अर्थात् वह जीवित होते हुए भी मृत के समान है॥31॥ | | | | The one from whose kingdom weeping and wailing women are forcefully abducted and their husbands and sons are left weeping and wailing is not a king but a dead person. That is, he is like a dead person while being alive. ॥ 31॥ | | ✨ ai-generated | | |
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