श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 63: राजाके लिये यज्ञ, दान और ब्राह्मण आदि प्रजाकी रक्षाका उपदेश  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.63.27 
येषां स्वादूनि भोज्यानि समवेक्ष्यन्ति बालका:।
नाश्नन्ति विधिवत् तानि किं नु पापतरं तत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जिसके स्वादिष्ट भोजन के लिए छोटे-छोटे बच्चे लालायित रहते हैं, परन्तु वे उसे उचित रीति से नहीं खा पाते, उससे बड़ा पाप और क्या हो सकता है? ॥27॥
 
What greater sin can a man commit than the one whose delicious food is longing for little children but they do not get to eat it in a fair way? ॥27॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd