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mahabharat 13.63.24: जब राजा का विधिपूर्वक राज्याभिषेक हो जाए और वह सिंहासन पर बैठ जाए, तब राजा को अनेक दक्षिणाओं से युक्त महान यज्ञ करना चाहिए ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 13.63: राजाके लिये यज्ञ, दान और ब्राह्मण आदि प्रजाकी रक्षाका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 63: राजाके लिये यज्ञ, दान और ब्राह्मण आदि प्रजाकी रक्षाका उपदेश  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.63.24 
यदा परिनिषिच्येत निहितो वै यथाविधि।
तदा राजा महायज्ञैर्यजेत बहुदक्षिणै:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जब राजा का विधिपूर्वक राज्याभिषेक हो जाए और वह सिंहासन पर बैठ जाए, तब राजा को अनेक दक्षिणाओं से युक्त महान यज्ञ करना चाहिए ॥24॥
 
When the king is formally crowned and sits on the throne, then the king should perform a great yagya consisting of many dakshinas. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)