Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.63.18-19h: भरत! ब्राह्मणों के पास जो कुछ नहीं है, उसे देना और जो कुछ उनके पास है, उसकी रक्षा करना तुम्हारा दैनिक कर्तव्य है। तुम्हारा जीवन उनकी सेवा में समर्पित होना चाहिए। उनकी रक्षा करने से तुम्हें कभी विमुख नहीं होना चाहिए॥18 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.63: राजाके लिये यज्ञ, दान और ब्राह्मण आदि प्रजाकी रक्षाका उपदेश । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
योग: क्षेमश्च ते नित्यं ब्राह्मणेष्वस्तु भारत॥ १८॥
तदर्थं जीवितं तेऽस्तु मा तेभ्योऽप्रतिपालनम्।
अनुवाद
भरत! ब्राह्मणों के पास जो कुछ नहीं है, उसे देना और जो कुछ उनके पास है, उसकी रक्षा करना तुम्हारा दैनिक कर्तव्य है। तुम्हारा जीवन उनकी सेवा में समर्पित होना चाहिए। उनकी रक्षा करने से तुम्हें कभी विमुख नहीं होना चाहिए॥18 1/2॥
Bharat! It is your daily duty to give to the brahmins whatever they do not have and to protect whatever they have. Your life should be devoted to serving them. You should never turn away from protecting them.॥18 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥