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राजसूयाश्वमेधाभ्यां श्रेयस्तत् क्षत्रियान् प्रति॥ १५॥
एवं पापैर्विनिर्मुक्तस्त्वं पूत: स्वर्गमाप्स्यसि।
अनुवाद
क्षत्रियों के लिए वह कर्म राजसूय और अश्वमेध यज्ञ से भी अधिक कल्याणकारी है। ऐसा करने से तुम सब पापों से मुक्त होकर पवित्र हो जाओगे और स्वर्ग को जाओगे।
For Kshatriyas, that act is more beneficial than even the Rajasuya and Ashwamedha sacrifices. By doing this, you will be freed from all sins and purified and will go to heaven.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥