Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.63.14-15h: यदि वे ब्राह्मण, जिनका आचरण निन्दनीय नहीं है, जीविका के बिना कष्ट में हों, तो उन्हें खोजकर गुप्त या प्रकट रूप से उनकी जीविका का प्रबन्ध करना चाहिए और सदैव उनकी सहायता करनी चाहिए ॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.63: राजाके लिये यज्ञ, दान और ब्राह्मण आदि प्रजाकी रक्षाका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 63: राजाके लिये यज्ञ, दान और ब्राह्मण आदि प्रजाकी रक्षाका उपदेश  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  13.63.14-15h 
अजुुगुप्सांश्च विज्ञाय ब्राह्मणान् वृत्तिकर्शितान्॥ १४॥
उपच्छन्नं प्रकाशं वा वृत्त्या तान् प्रतिपालयेत्।
 
 
अनुवाद
यदि वे ब्राह्मण, जिनका आचरण निन्दनीय नहीं है, जीविका के बिना कष्ट में हों, तो उन्हें खोजकर गुप्त या प्रकट रूप से उनकी जीविका का प्रबन्ध करना चाहिए और सदैव उनकी सहायता करनी चाहिए ॥14 1/2॥
 
If those brahmins, whose conduct is not condemnable, are suffering without a livelihood, one should find them out and make arrangements for their livelihood either secretly or openly and should always support them. ॥14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)