श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 62: श्रेष्ठ अयाचक, धर्मात्मा, निर्धन एवं गुणवान‍्को दान देनेका विशेष फल  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.62.9 
पूज्या हि ज्ञानविज्ञानतपोयोगसमन्विता:।
तेभ्य: पूजां प्रयुञ्जीथा ब्राह्मणेभ्य: परंतप॥ ९॥
 
 
अनुवाद
परंतप! जो ब्राह्मण ज्ञान, विज्ञान, तप और योग से युक्त हैं, वे पूजनीय हैं। आपको सदैव उन ब्राह्मणों की पूजा करनी चाहिए॥9॥
 
Parantapa! The Brahmins who are endowed with knowledge, science, penance and yoga are worthy of worship. You should always worship those Brahmins.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)