श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 62: श्रेष्ठ अयाचक, धर्मात्मा, निर्धन एवं गुणवान‍्को दान देनेका विशेष फल  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.62.4 
याच्यमाहुरनीशस्य अभिहारं च भारत।
उद्वेजयन्ति याचन्ति सदा भूतानि दस्युवत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! दरिद्र का भीख मांगना उसके लिए तिरस्कार का कारण माना जाता है; क्योंकि भीख मांगने वाले प्राणी लुटेरों के समान सदैव लोगों को कष्ट देते रहते हैं।
 
O Bharata! The begging of a poor person is considered a cause of contempt for him; because begging beings, like robbers, always keep troubling the people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)