Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.62.3: जो क्षत्रिय रक्षा के कार्य में धैर्य रखता है और जो ब्राह्मण भिक्षा न मांगने में दृढ़ है, वह श्रेष्ठ है। जो ब्राह्मण धैर्यवान, विद्वान और संतोषी है, वह अपने आचरण से देवताओं को संतुष्ट करता है। 3॥ | mahabharat अध्याय 13.62: श्रेष्ठ अयाचक, धर्मात्मा, निर्धन एवं गुणवान्को दान देनेका विशेष फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो क्षत्रिय रक्षा के कार्य में धैर्य रखता है और जो ब्राह्मण भिक्षा न मांगने में दृढ़ है, वह श्रेष्ठ है। जो ब्राह्मण धैर्यवान, विद्वान और संतोषी है, वह अपने आचरण से देवताओं को संतुष्ट करता है। 3॥
The Kshatriya who is patient in the task of protection and the Brahmin who is firm in not begging is the best. The Brahmin who is patient, learned and content, satisfies the gods with his behavior. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥