श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 62: श्रेष्ठ अयाचक, धर्मात्मा, निर्धन एवं गुणवान‍्को दान देनेका विशेष फल  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.62.2 
भीष्म उवाच
श्रेयो वै याचत: पार्थ दानमाहुरयाचते।
अर्हत्तमो वै धृतिमान् कृपणादधृतात्मन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - युधिष्ठिर! भिक्षा मांगने वाले को देने की अपेक्षा, भिक्षा न मांगने वाले को देना अधिक श्रेष्ठ तथा लाभदायक माना गया है। तथा अधीर एवं कृपण व्यक्ति की अपेक्षा धैर्यवान व्यक्ति अधिक आदर के योग्य है।॥ 2॥
 
Bhishma said - Yudhishthira! Giving to a person who does not beg is considered to be better and more beneficial than giving to a person who begs. And a person who has patience is more worthy of respect than an impatient and miserly person.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)