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mahabharat 13.62.11-13h: कुरुपुत्र! तुम उन श्रेष्ठ ब्राह्मणों को बुलाओ जो ज्ञान और वैदिक व्रतों में निपुण हों, जो अपनी जीविका के लिए किसी पर निर्भर न हों, जिनका अध्ययन और तप गुप्त हो तथा जो कठोर व्रतों का पालन करते हों, और उनके लिए दास-दासी, आवश्यक वस्तुओं तथा अन्य उपभोग्य वस्तुओं से सुसज्जित एक सुंदर भवन बनवाओ।   |   mahabharat अध्याय 13.62: श्रेष्ठ अयाचक, धर्मात्मा, निर्धन एवं गुणवान‍्को दान देनेका विशेष फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 62: श्रेष्ठ अयाचक, धर्मात्मा, निर्धन एवं गुणवान‍्को दान देनेका विशेष फल  »  श्लोक 11-13h
 
 
श्लोक  13.62.11-13h 
विद्यावेदव्रतस्नातानव्यपाश्रयजीविन:॥ ११॥
गूढस्वाध्यायतपसो ब्राह्मणान् संशितव्रतान्।
कृतैरावसथैर्हृद्यै: सप्रेष्यै: सपरिच्छदै:॥ १२॥
निमन्त्रयेथा: कौरव्य कामैश्चान्यैर्द्विजोत्तमान्।
 
 
अनुवाद
कुरुपुत्र! तुम उन श्रेष्ठ ब्राह्मणों को बुलाओ जो ज्ञान और वैदिक व्रतों में निपुण हों, जो अपनी जीविका के लिए किसी पर निर्भर न हों, जिनका अध्ययन और तप गुप्त हो तथा जो कठोर व्रतों का पालन करते हों, और उनके लिए दास-दासी, आवश्यक वस्तुओं तथा अन्य उपभोग्य वस्तुओं से सुसज्जित एक सुंदर भवन बनवाओ।
 
Son of Kuru! You should invite those excellent Brahmins who are proficient in knowledge and Vedic vows, who do not depend on anyone for their livelihood, whose studies and austerities are secret and who follow strict vows, and build them a beautiful house equipped with servants, essential goods and other consumer goods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)