युधिष्ठिर उवाच
यौ च स्यातां चरणेनोपपन्नौ
यौ विद्यया सदृशौ जन्मना च।
ताभ्यां दानं कतमस्मै विशिष्ट-
मयाचमानाय च याचते च॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! यदि सदाचार, विद्या और वंश में समान प्रतीत होने वाले दो ब्राह्मणों में से एक भिखारी हो और दूसरा अभिक्षापात्र हो, तो किसे दान देने से उत्तम फल प्राप्त होता है?
Yudhishthir asked – Grandfather! If among two Brahmins who appear to be similar in good conduct, education and lineage, one is a beggar and the other is a non-beggar, then who gets the best results by donating to whom?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥