Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.62.1: युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! यदि सदाचार, विद्या और वंश में समान प्रतीत होने वाले दो ब्राह्मणों में से एक भिखारी हो और दूसरा अभिक्षापात्र हो, तो किसे दान देने से उत्तम फल प्राप्त होता है?   |   mahabharat अध्याय 13.62: श्रेष्ठ अयाचक, धर्मात्मा, निर्धन एवं गुणवान‍्को दान देनेका विशेष फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 62: श्रेष्ठ अयाचक, धर्मात्मा, निर्धन एवं गुणवान‍्को दान देनेका विशेष फल  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.62.1 
युधिष्ठिर उवाच
यौ च स्यातां चरणेनोपपन्नौ
यौ विद्यया सदृशौ जन्मना च।
ताभ्यां दानं कतमस्मै विशिष्ट-
मयाचमानाय च याचते च॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! यदि सदाचार, विद्या और वंश में समान प्रतीत होने वाले दो ब्राह्मणों में से एक भिखारी हो और दूसरा अभिक्षापात्र हो, तो किसे दान देने से उत्तम फल प्राप्त होता है?
 
Yudhishthir asked – Grandfather! If among two Brahmins who appear to be similar in good conduct, education and lineage, one is a beggar and the other is a non-beggar, then who gets the best results by donating to whom?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)