Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.61.41: हे भरतश्रेष्ठ! हे पृथ्वीपति! मैंने ब्राह्मणों के लिए जो कुछ किया है, उससे मैं इन पवित्र लोकों को देखकर संतुष्ट हूँ। अब मुझे इस बात का दुःख नहीं है कि मैंने कोई अन्य शुभ कर्म क्यों नहीं किया॥ 41॥ | mahabharat अध्याय 13.61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे भरतश्रेष्ठ! हे पृथ्वीपति! मैंने ब्राह्मणों के लिए जो कुछ किया है, उससे मैं इन पवित्र लोकों को देखकर संतुष्ट हूँ। अब मुझे इस बात का दुःख नहीं है कि मैंने कोई अन्य शुभ कर्म क्यों नहीं किया॥ 41॥
O best of the Bharatas! O Lord of the earth! Whatever I have done for the Brahmins, I am satisfied by seeing these holy worlds. Now I am not upset about why I did not do any other good deed.॥ 41॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि एकोनषष्टितमोऽध्याय:॥ ५९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें उनसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥