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श्लोक  13.61.38 
त्वत्तश्च मे प्रियतर: पृथिव्यां नास्ति कश्चन।
त्वत्तोऽपि मे प्रियतरा ब्राह्मणा भरतर्षभ॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! इस पृथ्वी पर मुझे आपसे अधिक प्रिय कोई नहीं है; परंतु ब्राह्मण तो आपसे भी अधिक प्रिय हैं।
 
O best of the Bharatas, there is no one more dear to me on this earth than you; but the Brahmins are dearer than you even. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)