Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.61.30-31: हे प्रिये! यदि क्षत्रियों द्वारा ब्राह्मणों का आदर न किया जाए और ब्राह्मण भी क्षत्रियों के निरन्तर क्रूर कर्मों को देखकर उनका परित्याग कर दें, तो वे क्षत्रिय भी वेद, यज्ञ, उत्तम लोक और जीविका से वंचित हो जाएँगे। ऐसी स्थिति में, आपके अतिरिक्त उन क्षत्रियों के अस्तित्व का क्या प्रयोजन है, जो ब्राह्मणों की शरण में आए हैं? | mahabharat अध्याय 13.61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रिये! यदि क्षत्रियों द्वारा ब्राह्मणों का आदर न किया जाए और ब्राह्मण भी क्षत्रियों के निरन्तर क्रूर कर्मों को देखकर उनका परित्याग कर दें, तो वे क्षत्रिय भी वेद, यज्ञ, उत्तम लोक और जीविका से वंचित हो जाएँगे। ऐसी स्थिति में, आपके अतिरिक्त उन क्षत्रियों के अस्तित्व का क्या प्रयोजन है, जो ब्राह्मणों की शरण में आए हैं?
O dear! If Brahmins are not respected by Kshatriyas and Brahmins too abandon them after seeing the cruel acts that Kshatriyas always practice, then those Kshatriyas will also be deprived of Vedas, Yajnas, good worlds and livelihood. In that case, what is the purpose of the existence of those Kshatriyas other than you who have taken shelter of Brahmins?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥