Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.61.26: ऊँघ! अपने शरीर और घर की शोभा बढ़ाने के लिए अथवा बल बढ़ाने के लिए जो भी धन तुम्हारे पास हो, उसी से तुम्हें स्वधर्म का अनुष्ठान करके ब्राह्मणों का पूजन करना चाहिए। 26॥ | mahabharat अध्याय 13.61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यच्छोभार्थं बलार्थं वा वित्तमस्ति तवानघ।
तेन ते ब्राह्मणा: पूज्या: स्वधर्ममनुतिष्ठता॥ २६॥
अनुवाद
ऊँघ! अपने शरीर और घर की शोभा बढ़ाने के लिए अथवा बल बढ़ाने के लिए जो भी धन तुम्हारे पास हो, उसी से तुम्हें स्वधर्म का अनुष्ठान करके ब्राह्मणों का पूजन करना चाहिए। 26॥
Ungh! You should worship Brahmins by performing rituals of Swadharma with whatever wealth you have to enhance the beauty of your body and house or to increase your strength. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥