Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.61.23: उपर्युक्त ब्राह्मण निःस्वार्थ होने के कारण दान देने वाले के प्रति विशेष आदर नहीं रखते। उनमें से बहुत से तो धन कमाने में लगे ही नहीं रहते। ऐसे ब्राह्मणों का पुत्रों के समान पालन करना चाहिए। उन्हें बार-बार नमस्कार है। हमें उनसे कोई भय नहीं होना चाहिए। 23॥   |   mahabharat अध्याय 13.61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.61.23 
एते न बहु मन्यन्ते न प्रवर्तन्ति चापरे।
पुत्रवत् परिपाल्यास्ते नमस्तेभ्यस्तथाभयम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
उपर्युक्त ब्राह्मण निःस्वार्थ होने के कारण दान देने वाले के प्रति विशेष आदर नहीं रखते। उनमें से बहुत से तो धन कमाने में लगे ही नहीं रहते। ऐसे ब्राह्मणों का पुत्रों के समान पालन करना चाहिए। उन्हें बार-बार नमस्कार है। हमें उनसे कोई भय नहीं होना चाहिए। 23॥
 
The above mentioned Brahmins, being selfless, do not show special respect towards the donor. Many of them are not engaged in earning money at all. Such Brahmins should be followed like sons. Salutations to him again and again. We should have no fear from them. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)