Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.61.22: जो ब्राह्मण कभी क्रोध नहीं करते, जिनके हृदय में किंचितमात्र भी लोभ नहीं है और जो मधुर वचन बोलते हैं, वे हमारे लिए परम पूजनीय हैं ॥ 22॥ | mahabharat अध्याय 13.61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
य एवं नैव कुप्यन्ते न लुभ्यन्ति तृणेष्वपि।
त एव न: पूज्यतमा ये चापि प्रियवादिन:॥ २२॥
अनुवाद
जो ब्राह्मण कभी क्रोध नहीं करते, जिनके हृदय में किंचितमात्र भी लोभ नहीं है और जो मधुर वचन बोलते हैं, वे हमारे लिए परम पूजनीय हैं ॥ 22॥
Those brahmins who never become angry, who do not have even the slightest greed in their hearts and who speak sweet words, are the most revered by us. ॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥