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mahabharat 13.61.20: हे प्रिय! आपके द्वारा किया गया विशाल दान-यज्ञ श्रद्धापूर्वक पवित्र है और दक्षिणा सहित है। यह अन्य सभी यज्ञों से महान है। आपके दाता का वह यज्ञ सदैव चलता रहे।   |   mahabharat अध्याय 13.61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.61.20 
एष ते विततो यज्ञ: श्रद्धापूत: सदक्षिण:।
विशिष्ट: सर्वयज्ञेभ्यो ददतस्तात वर्तताम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिय! आपके द्वारा किया गया विशाल दान-यज्ञ श्रद्धापूर्वक पवित्र है और दक्षिणा सहित है। यह अन्य सभी यज्ञों से महान है। आपके दाता का वह यज्ञ सदैव चलता रहे।
 
O dear! The huge donation-yagya performed by you is pure with faith and is accompanied by dakshina. It is greater than all other sacrifices. May that sacrifice of your donor continue forever.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)