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mahabharat 13.61.16: युधिष्ठिर! यदि तुम्हारा दान भक्तिपूर्वक, शुद्ध एवं कर्तव्य भावना से किया गया है, तो पुण्य कर्म करने वाले पुण्यात्मा लोग उसे श्रेष्ठ मानेंगे॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 13.61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.61.16 
यदि ते प्रतिगृह्णीयु: श्रद्धापूतं युधिष्ठिर।
कार्यमित्येव मन्वाना धार्मिका: पुण्यकर्मिण:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! यदि तुम्हारा दान भक्तिपूर्वक, शुद्ध एवं कर्तव्य भावना से किया गया है, तो पुण्य कर्म करने वाले पुण्यात्मा लोग उसे श्रेष्ठ मानेंगे॥ 16॥
 
Yudhishthira! If your donation is made with devotion and is pure and out of a sense of duty, then the virtuous people who perform pious deeds will accept it as the best.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)