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अमित्रमपि चेद् दीनं शरणैषिणमागतम्।
व्यसने योऽनुगृह्णाति स वै पुरुषसत्तम:॥ १०॥
अनुवाद
यदि कोई शत्रु भी दीन होकर शरण लेने के लिए अपने घर आ जाए, तो भी जो संकट के समय उस पर दया करता है, वह मनुष्यों में श्रेष्ठ है ॥10॥
Even if an enemy comes to his home feeling humble and seeking shelter, then the one who shows mercy to him in times of trouble is the best among humans. 10 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥