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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.61.1 
युधिष्ठिर उवाच
यानीमानि बहिर्वेद्यां दानानि परिचक्षते।
तेभ्यो विशिष्टं किं दानं मतं ते कुरुपुंगव॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - कुरुश्रेष्ठ! आपके विचार से वेदी के बाहर दिए जाने वाले अन्य सभी दानों से श्रेष्ठ कौन-सा दान है?
 
Yudhishthir asked – Kurusrestha! Which charity in your opinion is better than all the other donations that are offered outside the altar? 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)