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mahabharat 13.60.33: अतः मनुष्य को तालाब खोदना, बगीचा लगाना, विविध यज्ञ करना और सदैव सत्य बोलना चाहिए ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 13.60: जलाशय बनानेका तथा बगीचे लगानेका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 60: जलाशय बनानेका तथा बगीचे लगानेका फल  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.60.33 
तस्मात् तडागं कुर्वीत आरामांश्चैव रोपयेत्।
यजेच्च विविधैर्यज्ञै: सत्यं च सततं वदेत्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
अतः मनुष्य को तालाब खोदना, बगीचा लगाना, विविध यज्ञ करना और सदैव सत्य बोलना चाहिए ॥33॥
 
Therefore, a man should dig a pond, plant a garden, perform various sacrifices and always speak the truth. ॥ 33॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि आरामतडागवर्णनं नाम अष्टपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें बगीचा लगाने और तालाब बनानेका वर्णन नामक अट्ठावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)