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mahabharat 13.60.32: जो तालाब बनवाता है, वृक्ष लगाता है, यज्ञ करता है और सत्य बोलता है, ये सब द्विज स्वर्ग में सम्मानित होते हैं ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 13.60: जलाशय बनानेका तथा बगीचे लगानेका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 60: जलाशय बनानेका तथा बगीचे लगानेका फल  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  13.60.32 
तडागकृद् वृक्षरोपी इष्टयज्ञश्च यो द्विज:।
एते स्वर्गे महीयन्ते ये चान्ये सत्यवादिन:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जो तालाब बनवाता है, वृक्ष लगाता है, यज्ञ करता है और सत्य बोलता है, ये सब द्विज स्वर्ग में सम्मानित होते हैं ॥32॥
 
One who builds a pond, plants a tree, performs yagnas and speaks the truth, all these twice-born are honoured in heaven. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)