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mahabharat 13.60.30: जो वृक्ष फलते-फूलते हैं, वे इस लोक में मनुष्यों को तृप्त करते हैं। जो वृक्षों का दान करता है, उसे वृक्ष परलोक में पुत्र के समान बचाते हैं ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 13.60: जलाशय बनानेका तथा बगीचे लगानेका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 60: जलाशय बनानेका तथा बगीचे लगानेका फल  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.60.30 
पुष्पिता: फलवन्तश्च तर्पयन्तीह मानवान्।
वृक्षदं पुत्रवद् वृक्षास्तारयन्ति परत्र तु॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जो वृक्ष फलते-फूलते हैं, वे इस लोक में मनुष्यों को तृप्त करते हैं। जो वृक्षों का दान करता है, उसे वृक्ष परलोक में पुत्र के समान बचाते हैं ॥30॥
 
Trees that bloom and bear fruits satisfy human beings in this world. The trees save the one who donates trees like a son in the next world. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)