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mahabharat 13.60.25: इस लोक में उसका नाम होता है, परलोक में उसके पितर उसका आदर करते हैं और यदि वह स्वर्ग में भी चला जाए तो भी यहाँ उसका नाम नष्ट नहीं होता ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 13.60: जलाशय बनानेका तथा बगीचे लगानेका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 60: जलाशय बनानेका तथा बगीचे लगानेका फल  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.60.25 
लभते नाम लोके च पितृभिश्च महीयते।
देवलोके गतस्यापि नाम तस्य न नश्यति॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इस लोक में उसका नाम होता है, परलोक में उसके पितर उसका आदर करते हैं और यदि वह स्वर्ग में भी चला जाए तो भी यहाँ उसका नाम नष्ट नहीं होता ॥25॥
 
He has a name in this world, his ancestors respect him in the next world, and even if he goes to heaven, his name does not get destroyed here. ॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)