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mahabharat 13.60.22: इस प्रकार मैंने तालाब बनाने के शुभ फल का वर्णन किया है। इसके बाद मैं वृक्ष लगाने का महत्व बताऊँगा ॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 13.60: जलाशय बनानेका तथा बगीचे लगानेका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 60: जलाशय बनानेका तथा बगीचे लगानेका फल  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.60.22 
एवमेतत् तडागस्य कीर्तितं फलमुत्तमम्।
अत ऊर्ध्वं प्रवक्ष्यामि वृक्षाणामवरोपणम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने तालाब बनाने के शुभ फल का वर्णन किया है। इसके बाद मैं वृक्ष लगाने का महत्व बताऊँगा ॥ 22॥
 
In this way I have described the good results of constructing a pond. After this I will tell the importance of planting trees. ॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)