श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.6.8 
क्षेत्रं पुरुषकारस्तु दैवं बीजमुदाहृतम्।
क्षेत्रबीजसमायोगात् तत: सस्यं समृद्‍ध्यते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पुरुषार्थ ही क्षेत्र है और भाग्य ही बीज है। क्षेत्र और बीज के संयोग से ही अन्न उत्पन्न होता है ॥8॥
 
Purusharth is the field and destiny is the seed. It is from the conjunction of field and seed that grains are produced. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)