श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  13.6.44 
यथा तैलक्षयाद् दीप: प्रह्रासमुपगच्छति।
तथा कर्मक्षयाद् दैवं प्रह्रासमुपगच्छति॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जैसे तेल समाप्त हो जाने पर दीपक बुझ जाता है, वैसे ही कर्म क्षीण हो जाने पर भाग्य भी नष्ट हो जाता है ॥ 44॥
 
Just as a lamp is extinguished when the oil in it is finished, similarly, when the karma is weakened, even destiny is destroyed. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)