vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन
»
श्लोक 41
श्लोक
13.6.41
तपोनियमसंयुक्ता मुनय: संशितव्रता:।
किं ते दैवबलात् शापमुत्सृजन्ते न कर्मणा॥ ४१॥
अनुवाद
क्या कठोर तप और अनुशासन का पालन करने वाले ऋषिगण अपने प्रयत्नों से नहीं, अपितु ईश्वर की शक्ति से किसी को शाप देते हैं? ॥41॥
Do the sages who follow a strict vow of austerity and discipline curse someone by the power of God and not by their efforts? ॥41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×