श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.6.36 
शक्रस्योद्‍गम्य चरणं प्रस्थितो जनमेजय:।
द्विजस्त्रीणां वधं कृत्वा किं दैवेन न वारित:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जब राजा जनमेजय द्विज स्त्रियों को मारकर इन्द्र के चरणों की शरण लेकर स्वर्ग की ओर चले गए, तब देवताओं ने आकर उन्हें क्यों नहीं रोका ? 36॥
 
When King Janamejaya, after killing the twice-born women, took shelter at the feet of Indra and ascended to heaven, why did the gods not come and stop him? 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)