श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.6.16 
शौचेन लभते विप्र: क्षत्रियो विक्रमेण तु।
वैश्य: पुरुषकारेण शूद्र: शुश्रूषया श्रियम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण शौच से, क्षत्रिय वीरता से, वैश्य उद्योग से और शूद्र तीनों वर्णों की सेवा से धन प्राप्त करता है ॥16॥
 
Brahmin acquires wealth through cleanliness, Kshatriya through bravery, Vaishya through industry and Shudra through service of all the three varnas. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)