| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 59: विविध प्रकारके तप और दानोंका फल » श्लोक 6 |
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| | | | श्लोक 13.59.6  | वैशम्पायन उवाच
युधिष्ठिरस्य तद् वाक्यं श्रुत्वा भीष्मो महामना:।
परीक्ष्य निपुणं बुद्ध्या युधिष्ठिरमभाषत॥ ६॥ | | | | | | अनुवाद | | वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! युधिष्ठिर की यह बात सुनकर महामनस्वी भीष्म ने बुद्धि से विचार करके उनसे इस प्रकार कहा -॥6॥ | | | | Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing this statement of Yudhishthira, the great-minded Bhishma, after carefully pondering over it with his intellect, said to him thus:॥ 6॥ | | ✨ ai-generated | | |
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