श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 59: विविध प्रकारके तप और दानोंका फल  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  13.59.35 
छत्रप्रदानेन गृहं वरिष्ठं
यानं तथोपानहसम्प्रदाने।
वस्त्रप्रदानेन फलं सुरूपं
गन्धप्रदानात् सुरभिर्नर: स्यात्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
‘छाता दान करने से उत्तम घर मिलता है, जूते दान करने से सवारी मिलती है, वस्त्र दान करने से सुन्दर रूप मिलता है और सुगंध दान करने से सुगन्धित शरीर मिलता है ॥35॥
 
‘By donating an umbrella one gets a better house, by donating shoes one gets a ride, by donating clothes one gets a beautiful appearance and by donating fragrance one gets a fragrant body. 35॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd