श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 59: विविध प्रकारके तप और दानोंका फल  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.59.29 
यावन्ति रोमाणि भवन्ति धेन्वा-
स्तावत् कालं प्राप्य स गोप्रदानात् ।
पुत्रांश्च पौत्रांश्च कुलं च सर्व-
मासप्तमं तारयते परत्र॥ २९॥
 
 
अनुवाद
‘गौदान करने से मनुष्य उस गौ के शरीर पर जितने रोम होते हैं, उतने वर्षों तक स्वर्ग का सुख भोगता है। इतना ही नहीं, वह गौ परलोक में उसके पुत्र, पौत्र आदि समस्त कुल को सात पीढ़ियों तक मुक्ति प्रदान करती है।॥29॥
 
‘The man enjoys heavenly bliss for as many years as the number of hairs on the body of that cow by virtue of donating a cow. Not only this, that cow liberates the entire family of his sons, grandsons etc. for seven generations in the next world.॥ 29॥
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