श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 59: विविध प्रकारके तप और दानोंका फल  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.59.27 
सुवर्णशृंगैस्तु विराजितानां
गवां सहस्रस्य नर: प्रदानात् ।
प्राप्नोति पुण्यं दिवि देवलोक-
मित्येवमाहुर्दिवि देवसंघा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ण मण्डित सींगों से विभूषित एक हजार गौओं का दान करने से मनुष्य पवित्र स्वर्गलोक को प्राप्त होता है, ऐसा स्वर्गवासी देवता कहते हैं॥27॥
 
By donating a thousand cows adorned with gold-plated horns, a man attains the sacred heavenly abode, say the gods who reside in heaven.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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