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श्लोक 13.59.20  |
पानीयस्य प्रदानेन कीर्तिर्भवति शाश्वती।
अन्नस्य तु प्रदानेन तृप्यन्ते कामभोगत:॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| ‘जलदान करने से मनुष्य को चिरस्थायी यश की प्राप्ति होती है और अन्नदान करने से मनुष्य को कामनाओं और भोगों की पूर्ण तृप्ति प्राप्त होती है।॥20॥ |
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| ‘By donating water a man gets everlasting fame, and by donating food a man gets complete satisfaction from desires and pleasures.॥ 20॥ |
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