श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 58: च्यवन ऋषिका भृगुवंशी और कुशिकवंशियोंके सम्बन्धका कारण बताकर तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.58.6 
कंचित् कालं तु वह्निं च स एव शमयिष्यति।
समुद्रे वडवावक्त्रे प्रक्षिप्य मुनिसत्तम:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
कुछ समय बाद महामुनि और्व उस अग्नि को समुद्र में स्थित प्रचण्ड अग्नि में डालकर बुझा देंगे ॥6॥
 
After some time the great sage Aurva will extinguish that fire by putting it into the huge fire situated in the ocean. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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