श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 58: च्यवन ऋषिका भृगुवंशी और कुशिकवंशियोंके सम्बन्धका कारण बताकर तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.58.5 
स त्रैलोक्यविनाशाय कोपाग्निं जनयिष्यति।
महीं सपर्वतवनां य: करिष्यति भस्मसात्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वह तीनों लोकों का नाश करने के लिए क्रोधजनित अग्नि उत्पन्न करेगा। वह अग्नि पर्वतों और वनों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी को भस्म कर देगी। ॥5॥
 
He will create a fire born of anger to destroy the three worlds. That fire will consume the entire earth including the mountains and forests. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)