श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 58: च्यवन ऋषिका भृगुवंशी और कुशिकवंशियोंके सम्बन्धका कारण बताकर तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.58.4 
तत उत्पत्स्यतेऽस्माकं कुले गोत्रविवर्धन:।
ऊर्वो नाम महातेजा ज्वलनार्कसमद्युति:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मेरे वंश में उर्वा नामक एक अत्यन्त तेजस्वी बालक उत्पन्न होगा, जो भार्गव गोत्र की वृद्धि करेगा। उसका तेज अग्नि के समान तथा तेज सूर्य के समान होगा।॥4॥
 
Thereafter, a very brilliant child named Urva will be born in my lineage, who will increase the Bhargava gotra. His brightness will be like fire and his intensity will be like the sun. 4॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd