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श्लोक 13.58.21  |
यथोक्तमृषिणा चापि तदा तदभवन्नृप।
जन्म रामस्य च मुनेर्विश्वामित्रस्य चैव हि॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| युधिष्ठिर! उस समय च्यवन ऋषि ने जो कहा था, उसके अनुसार आगे चलकर भृगु कुल में परशुराम और कुशिक कुल में विश्वामित्र का जन्म हुआ। |
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| Yudhishthira! As per what Sage Cyavana had said at that time, later on Parashurama was born in the Bhrigu clan and Vishwamitra was born in the Kushika clan. |
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इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि च्यवनकुशिकसंवादे षट्पञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें च्यवन और कुशिकका संवादविषयक छप्पनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५६॥
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