श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 58: च्यवन ऋषिका भृगुवंशी और कुशिकवंशियोंके सम्बन्धका कारण बताकर तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.58.20 
एतत् ते कथितं सर्वमशेषेण मया नृप।
भृगूणां कुशिकानां च अभिसम्बन्धकारणम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! इस प्रकार मैंने भृगुवंश और कुशिकवंश के पारस्परिक सम्बन्ध का कारण आपसे विस्तारपूर्वक कह ​​दिया है।
 
O lord of men! In this way I have explained to you in full detail the reason behind the mutual relationship between the Bhrigu dynasty and the Kushika dynasty.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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